समय चक्र और ज्योतिष

समय गति शील है यह किसी के लिए नही रुकता। गुज़रा कल कोई वापिस नही ला सकताए चाहे वह कितना खरबपति है। सृष्टिकर्ता ने सृष्टि बनाते ही हर चीज का समय विभाजित कर दिया। सृष्टिकर्ता की सबसे सुंदर रचना मानव है उसकी आयु के भी चार ही चरण है बाल्य अवस्था यौवन.अवस्था अधेड़ अवस्था और वृदधा
अवस्था। बाल्य अवस्था मे किए जाने वाले काम यदि मानव यौवन अवस्था मे करने लगे तो क्या उसे शोभा देगाएया यौवन अवस्था के क्रिया.कलापों को क्या वह वृद्धावस्था मे कर सकता है।

मानव.के साथ साथ जो अन्य जीव आत्माएँ है वह भी सब समयानुसार मृत्यु को प्राप्त कर लेती हैं समय मुट्ठी
Yes I Can Change
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मे पकड़ी रेत के समान हैए धीरे.धीरे मुट्ठी से फिसलता जाता है। जीवन एक बहुत बड़ी पाठशाला है और समय से बड़ा कोई शिक्षक नही। बीता वक्त हमे बहुत कुछ सीखा जाता है और हमे जागा जाता है। जब बीते समय मे की गयी गलतियां बुरे परिणाम देने लगे तो व्यक्ति स्वयं भविष्य मे उन गलतियों को न दौहराने का फैंसला कर लेता हैए लेकिन जो गलतियाँ नही थी समय ही खराब गुजर रहा था परिस्थितियाँ ही अनुकूल नही रहीए वैसा वक्त जीवन मे ना आने पायेए इस तरह की सोच रखने वाले हर प्राणी को ज्योतिषीय ज्ञान का सहारा लेना ही उचित है।

बच्चे के जन्म होते ही यदि एक सही ज्योतिषी की देख.रेख मे जन्म कुंडली बनवाई जाए तो कुंडली देखते ही यह जाना जा सकता है कि इस कुंडली मे कहाँ पर क्या कमियाँ हैं पहले उन कमियों को दूर करने के लिए सब उपाय करना जरूरी है फिर सालाना वर्ष.फल को देखते हुएए ग्रह.योगों के अनुसार उपाय करना जरूरी हैए जन्म होते ही बनवाई जाने वाली कुंडली से पता चल जाता है की उम्र के किस पड़ाव पर किस तरह की मुश्किलें आ सकती हैंए उस बुरे वक्त को आने से तो रोका नही जा सकता परंतु उस समय के ग्रह योगों के अनुसार पहले ही उपाय हो जाने के कारण नुकसान नाम.मात्र के बराबर होगा। ज्योतिष ज्ञान ही एक ऐसा ज्ञान है जिसके द्वारा जीवन मे आने वाले बुरे वक्त को जाना जा सकता है।

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