यज्ञ-हवन की महिमा

ज्योतिष शास्त्र, धर्म और यज्ञ-हवन द्वारा पूजा-पाठ एक दूसरे के पूरक विषय हैं। यज्ञ-हवन आदि क्रियाएँ हमारे आध्यात्म का स्तम्भ है। हवन आदि क्रियाओं मे इस प्रकार की सामग्री का इस्तेमाल होता है कि आस-पास के वातवरण मे फैले सब किटाणु मर जाते हैं। वातावरण शुद्ध हो जाता है और उसमे सकारात्म्क्ता प्रवाहित हो जाती है, यह एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण है लेकिन आध्यात्मिक बात यह है कि यज्ञ-हवन होते हैं तो देवताओं का आवाहन भी होता है, एक दैविक सुरक्षा चक्र उस वातावरण मे बन जाता है।

जिस घर मे यज्ञ हवन आदि क्रिया हो रही है, बुरी शक्तियाँ उस घर का कभी कुछ बिगाड़ नहीं सकती।
GD vashist
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सकरात्मकता हर पल वहाँ प्रवाहित होती है। धार्मिक प्रवती के लोग वर्ष मे एक बार या दो बार अपने घर पर यह हवन क्रिया आवश्य करते हैं। जहरीली गैस के वातावरण मे फैल जाने से भोपाल मे गैस ट्रेजडी हुई थी। यह मिथाईल आइसो साइनाइट गैस थी, जो एक कीट-नाशक गैस थी, और भोपाल की इस दुखद घटना का कारण बनी, धीरे-धीरे इस का रिसाव होने लगा और रिसाव होते-होते पूरे वातवरण मे यह फैलती गयी, इस के कारण 15000 से भी अधिक लोगो की जाने गयी, सैंकड़ों लोग अपंगता के शिकार हो गए।

यह दुर्घटना 1993 मे हुई थी। इस दुर्घटना के कारण, भोपाल के जिस क्षेत्र के लोग प्रभावित हुए थे , उसी क्षेत्र मे उस समय 3-4 घरों मे लोग हवन कर रहे थे, और उन घरों के लोगो पर, वातावरण मे फैली इस विषैली गैस का कोई प्रभाव नही पड़ा, आस-पास के घरों के लोग मारे गए या अपंग हो गए। यह बात उस समय काफी अचंभित कर देने वाली थी, संत महात्माओं की वाणी थी कि उन घरो पर यज्ञ-हवन होने के कारण दैविक शक्तियों का एक सुरक्षा-चक्र बन गया था, इस लिए विषैली गैस उन लोगों को कोई हानी ना पहुंचा पायी। यह तो आध्यत्मिक तथ्य था, कुछ वैज्ञानिको का कहना था, हवन के लिए जिस सामग्री का प्रयोग होता है, उस से, इस प्रकार धुआँ उठ रहा था कि उस धुएँ के कारण विषैली गैस उन लोगो तक पहुँच ही नही पाई । आध्यत्मिक तथ्य और वैज्ञानिक तथ्य दोनों अपने अपने स्थान पर एक दम सही थे। हिन्दू संस्कृति मे यज्ञ-हवन की विशेष महिमा है, कोई हिन्दू इसे नाकार नहीं सकता।